डिजिटल नफरत का बाज़ार: रीच की भूख में खोखला होता समाज
डिजिटल नफरत का बाज़ार: रीच की भूख में खोखला होता समाज आज हम 'डिजिटल इंडिया' के दौर में जी रहे हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में एक समझदार समाज की ओर बढ़ रहे हैं? जब हम अपने आसपास पढ़े-लिखे कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, दोस्तों और समाज के कर्णधारों को सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफरत और फेक न्यूज़ का अंधा पैरोकार बनते देखते हैं, तो यह सवाल पूछना बेहद लाज़मी हो जाता है। जिस युवा पीढ़ी के कंधों पर देश को 'विश्वगुरु' बनाने का भार है, वह आज लाइक्स, शेयर्स और रीच (Reach) के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। 1. समस्या क्या है और यह क्यों है? समस्या सिर्फ इतनी नहीं है कि सोशल मीडिया पर झूठ परोसा जा रहा है, बल्कि समस्या यह है कि इस झूठ को समाज के सबसे पढ़े-लिखे वर्ग द्वारा बिना जांचे-परखे स्वीकार और फॉरवर्ड किया जा रहा है। एल्गोरिदम का ट्रैप (The Algorithm Trap): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि वे शांत, सकारात्मक और तार्किक बातों के मुकाबले गुस्सा, नफरत और सनसनी फैलाने वाले कंटेंट को ज्यादा बढ़ावा देते हैं। जो जितना ज्यादा जहर उगलेगा, उसे उतनी ज्यादा रीच मिलेगी...