नकली किन्नरों का माफिया: टोल प्लाजा और ट्रैफिक सिग्नल्स पर बेगिंग का कड़वा सच और असली समाधान
आजकल हर हाईवे, टोल प्लाजा, रेड लाइट और ट्रेन-बस स्टेशन पर एक ही नजारा दिखता है — किन्नर (ट्रांसजेंडर) लोग हाथ फैलाकर पैसे मांगते हैं। कई बार जबरदस्ती, गाली-गलौज या मारपीट तक हो जाती है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये असली किन्नर हैं और इन्हें सहानुभूति मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत बहुत अलग है। इनमें से बड़ा हिस्सा नकली होता है — सामान्य युवा लड़के जो महिलाओं के कपड़े पहनकर, मेकअप करके बेगिंग का ऑर्गनाइज्ड बिजनेस चला रहे हैं। ये बेगिंग माफिया हैं, जो स्पेसिफिक इलाकों को कंट्रोल करते हैं। असली किन्नर कम्युनिटी की हकीकत सदियों पुरानी परंपरा: शादी, बच्चे के जन्म, नए घर जैसे शुभ मौकों पर बधाई देकर आशीर्वाद देते हैं और बदले में पैसे या गिफ्ट्स लेते हैं। ये बेगिंग नहीं, बल्कि कल्चरल प्रैक्टिस है। आज भेदभाव, शिक्षा की कमी, नौकरी न मिलना, परिवार द्वारा अस्वीकार किए जाने की वजह से कई असली ट्रांसजेंडर लोग मजबूरी में ट्रैफिक सिग्नल्स, हाईवे या टोल प्लाजा पर बेगिंग करने को मजबूर हैं। लेकिन असली किन्नर आमतौर पर जबरदस्ती नहीं करते — वो “श्राप” या “कर्स” देने की बात करते हैं, जो उनकी परंपरा का ह...