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Showing posts from February, 2026

1791 का काला सच: जब हिंदू सेना ने हिंदू मठ लूटा और मुस्लिम सुल्तान ने बचाया

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श्रृंगेरी शारदा पीठ — आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों में से एक, ज्ञान की देवी माँ शारदा का आसीन स्थल। यह मठ सदियों से विद्या, अध्यात्म और शांति का केंद्र रहा। ब्राह्मण पंडितों की तपस्या, शांत वातावरण, और लाखों की संपत्ति — सब कुछ सुरक्षित था, क्योंकि यह युद्ध से दूर, आध्यात्मिक भूमि मानी जाती थी। लेकिन तीसरे एंग्लो-मैसूर युद्ध (1790-1792) के दौरान, जब मराठा सेना (पेशवा के अधीन, ब्रिटिश और निज़ाम के साथ गठबंधन में) टीपू सुल्तान के खिलाफ मैसूर के क्षेत्रों पर आक्रमण कर रही थी, तब एक भयानक घटना घटी। अप्रैल 1791 में, मराठा कमांडर रघुनाथ राव 'दादा' कुरुंडवाडकर (परशुराम भाऊ पटवर्धन की सेना से जुड़े) के नेतृत्व वाली टुकड़ी के साथ चलने वाले पिंडारी (लुटेरे अनियमित घुड़सवार) और लामाण (अन्य लुटेरे दल) ने श्रृंगेरी पर छापा मारा। मठ के मंदिरों को लूटा गया। शारदा देवी की प्राचीन मूर्ति को अपवित्र किया गया, हटाया गया। ब्राह्मण पंडितों को पीटा, मारा गया; कई निर्दोष लोग मारे गए। महिलाओं पर अत्याचार हुए, कई ने आत्महत्या कर ली। लगभग 60 लाख रुपये की धन-संपत्ति, हाथी, ...

NHAI की टोल छूट नीति: देर आयद, दुरुस्त आयद? कंसेशनेयरों के लिए एक 'ढाल', लेकिन सवाल बाकी

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नमस्कार, @PublicPowerTalk के पाठकों! आज हम बात कर रहे हैं NHAI की हालिया पॉलिसी सर्कुलर (No. 17.7.13/2026, 9 फरवरी 2026) की, जो मदुरई हाईकोर्ट के फैसले और MoRTH के निर्देशों पर आधारित है। यह नीति राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 (NH Fee Rules) के सख्त अनुपालन पर जोर देती है, खासकर "शॉर्ट स्ट्रेच" (कम दूरी) के आधार पर छूट को पूरी तरह बंद कर। काप्पलुर टोल प्लाजा (NH-44, मदुरई) का केस इसकी जड़ है, जहां Jayakrishna Flour Mill ने छूट मांगी थी।  लेकिन क्या यह नीति समय पर आई?  1. नीति के फायदे: टोल कलेक्शन एजेंसी/कंसेशनेयर के नजरिए से यह नीति कंसेशनेयरों (जैसे Raima Toll Road Pvt Ltd या Madurai Kanyakumari Tollway Ltd) के लिए एक बड़ा सपोर्ट है, क्योंकि अब वे बिना डर के पूरा टोल वसूल सकते हैं।  मुख्य फायदे: राजस्व सुरक्षा: पहले स्थानीय दबाव (जैसे काप्पलुर में मिल के ट्रकों को छूट) से लाखों-करोड़ों का नुकसान होता था। अब "शॉर्ट स्ट्रेच" पर कोई छूट नहीं – हर वाहन से 100% वसूली। उदाहरण: अगर एक प्लाजा पर 20% वाहनों को जबरन छूट मिलती थी, तो अब राजस्व में 20-30% बढ़ोतरी संभव...

BJP IT सेल का डरावना खेल: कैसे झूठ फैलाकर देश तोड़ते हैं? – 2024-2026 के एक्सपोज़ और केस स्टडीज से तीखा खुलासा

  भारत का डिजिटल स्पेस अब सिर्फ कनेक्टेड नहीं, बल्कि कंट्रोल्ड है। और इस कंट्रोल की सबसे बड़ी मशीन है BJP IT सेल—अमित मालवीय के लीडरशिप में। ये सेल 2007 में बनी, लेकिन 2014 के बाद ये एक विशाल, हाइरार्किकल प्रोपगैंडा मशीन बन गई, जो AI, पेड ऑपरेटिव्स, और लाखों वॉलंटियर्स ("अंधभक्त" ट्रोल आर्मी) से चलती है। ये सिर्फ BJP को प्रमोट नहीं करती—ये विरोधियों को ट्रोल करती है, झूठ फैलाती है, कम्युनल हेट स्पीच पुश करती है, और नैरेटिव को कंट्रोल करती है। Alt News की 2025 एनालिसिस के मुताबिक, 159 पॉलिटिकल फैक्ट-चेक में से 61% (98 केस) प्रो-BJP थे—मतलब BJP कैंप ने सबसे ज्यादा डिसइनफॉर्मेशन यूज किया। अमित मालवीय टॉप पर रहे, जिनके 12 फेक क्लेम्स Alt News ने डिबंक किए। 1. BJP IT सेल की संरचना:  दिल्ली से ब्लॉक तक का पिरामिड नेशनल हेडक्वार्टर (दिल्ली): अमित मालवीय के नेतृत्व में 5,000-6,000 पेड/फुल-टाइम मेंबर्स। AI टूल्स यूज करके कंटेंट क्रिएट और ट्रेंड्स मॉनिटर करते हैं। स्टेट/डिस्ट्रिक्ट लेवल: 20 रीजनल सेंटर्स और 92 डिस्ट्रिक्ट यूनिट्स—लोकल भाषा/कल्चर में कंटेंट। ग्रासरूट नेटवर्क: 1.5-2 मिलि...

क्यों ज्यादातर लोग PF में Nominee Add नहीं करते? – एक छोटा लेकिन जरूरी ब्लॉग

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आजकल करोड़ों लोगों का PF (प्रोविडेंट फंड) अकाउंट है, लेकिन अफसोस की बात ये है कि ज्यादातर लोग nominee (नॉमिनी) ऐड ही नहीं करते। EPFO के आंकड़ों के अनुसार, लाखों अकाउंट्स में nominee डिटेल्स खाली पड़ी रहती हैं। क्यों नहीं करते लोग nominee ऐड? "अभी तो जवान हूँ, क्या जरूरत है?" "कभी सोचा ही नहीं" "ऑनलाइन प्रोसेस मुश्किल लगता है" "किसे nominee बनाऊँ, बाद में कर लेंगे" "PF तो मिल ही जाएगा, nominee की क्या जरूरत?" लेकिन सच ये है – अगर nominee नहीं है तो आपकी मेहनत की कमाई आपके परिवार तक नहीं पहुँचेगी। क्या होता है अगर nominee नहीं है? कर्मचारी की मृत्यु होने पर PF + पेंशन + इंश्योरेंस राशि कानूनी वारिसों को मिलती है। इसके लिए कोर्ट केस, सक्सेशन सर्टिफिकेट, फैमिली डिस्प्यूट – महीनों या सालों लग जाते हैं। परिवार को तुरंत पैसों की जरूरत होती है, लेकिन पैसा अटक जाता है। एक छोटा सा उदाहरण (रियल लाइफ स्टोरी जैसा) राहुल (32 साल) दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते थे। उनका PF में 8 लाख जमा थे। अचानक हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। nominee नहीं था → कंपनी न...

नकली किन्नरों का माफिया: टोल प्लाजा और ट्रैफिक सिग्नल्स पर बेगिंग का कड़वा सच और असली समाधान

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आजकल हर हाईवे, टोल प्लाजा, रेड लाइट और ट्रेन-बस स्टेशन पर एक ही नजारा दिखता है — किन्नर (ट्रांसजेंडर) लोग हाथ फैलाकर पैसे मांगते हैं। कई बार जबरदस्ती, गाली-गलौज या मारपीट तक हो जाती है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये असली किन्नर हैं और इन्हें सहानुभूति मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत बहुत अलग है। इनमें से बड़ा हिस्सा नकली होता है — सामान्य युवा लड़के जो महिलाओं के कपड़े पहनकर, मेकअप करके बेगिंग का ऑर्गनाइज्ड बिजनेस चला रहे हैं। ये बेगिंग माफिया हैं, जो स्पेसिफिक इलाकों को कंट्रोल करते हैं। असली किन्नर कम्युनिटी की हकीकत सदियों पुरानी परंपरा: शादी, बच्चे के जन्म, नए घर जैसे शुभ मौकों पर बधाई देकर आशीर्वाद देते हैं और बदले में पैसे या गिफ्ट्स लेते हैं। ये बेगिंग नहीं, बल्कि कल्चरल प्रैक्टिस है। आज भेदभाव, शिक्षा की कमी, नौकरी न मिलना, परिवार द्वारा अस्वीकार किए जाने की वजह से कई असली ट्रांसजेंडर लोग मजबूरी में ट्रैफिक सिग्नल्स, हाईवे या टोल प्लाजा पर बेगिंग करने को मजबूर हैं। लेकिन असली किन्नर आमतौर पर जबरदस्ती नहीं करते — वो “श्राप” या “कर्स” देने की बात करते हैं, जो उनकी परंपरा का ह...