वोट चोर - गद्दी छोड़!!
डोनाल्ड ट्रम्प ने कभी "वोट चोर- गद्दी छोड़!!" का नारा नहीं लगाया। अमेरिका ने अपने हित साधे हैं – मुख्य रूप से तेल के। लेकिन ट्रम्प को यह हिम्मत मादुरो की अवैध सत्ता से भी मिली है।
सोशल मीडिया पर वेनेजुएला के घटनाक्रम में मादुरो के लिए सहानुभूति की बाढ़ आई हुई है। किसी देश के राष्ट्रपति का "अपहरण" करके अमेरिका ले जाना खुली गुंडागर्दी है – निंदनीय।
लेकिन सच यह भी है कि निकोलस मादुरो खुद एक वोट चोर और धांधली से सत्ता पर काबिज हैं। वे चुनाव रिगिंग और संस्थानों पर कब्जे के साथ विपक्ष को कुचलने के दोषी हैं। इसे समझने के लिए पिछले 20 साल का इतिहास देखना होगा।
ह्यूगो शावेज का दौर: पारदर्शी चुनाव
वेनेजुएला में ह्यूगो शावेज राष्ट्रपति थे। वे तानाशाह जैसे थे, लेकिन बेहद लोकप्रिय। तेल की कमाई से देश विकसित किया और अमेरिका को चुनौती दी।
शावेज चुनाव सच में जीतते थे – बहुमत से। धांधली के आरोप न लगें, इसलिए पूरी पारदर्शी व्यवस्था रखी:
- वोटर आईडी दिखाकर ईवीएम पर वोट।
- वोट पर्ची निकलती, जिसे चेक कर बॉक्स में डालते।
- वोटिंग के बाद बूथ पर ही मशीन के नतीजे घोषित।
- अंतिम नतीजे VVPAT पर्चियों के मिलान से।
- सब कुछ बूथ पर, विपक्ष-पक्ष एजेंट्स और वोटर्स के सामने। Form 17C जैसा सर्टिफिकेट बनता, देश भर की टोटलिंग से अंतिम नतीजे।
इस व्यवस्था से शावेज की जीत पर कोई शक नहीं कर सकता था।
मादुरो का उदय और पतन
शावेज की मौत के बाद मादुरो उनके उत्तराधिकारी बने और आसानी से जीते। लेकिन 2024 तक हालात बदल गए। विपक्ष की मारिया कोरिना मचाडो (2025 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता) तेजी से लोकप्रिय हो रही थीं।
मादुरो ने उन पर विदेशी साजिश के आरोप लगाए (ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां विपक्ष पर लगते हैं) और उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया।
मचाडो की जगह एडमुंडो गोंजालेज ने चुनाव लड़ा। विपक्ष ने 80% बूथों से पर्चियां इकट्ठा कीं – गोंजालेज 67-70% वोटों से जीते। उन्होंने सभी Form 17C जैसे दस्तावेज वेबसाइट पर डाले।
लेकिन आधिकारिक मशीन नतीजों में मादुरो विजयी घोषित। सेना, न्यायपालिका, मीडिया सब उनके साथ। विरोध कुचल दिया गया।
अब क्या?
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने काराकास में ऑपरेशन कर मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। वे अब न्यूयॉर्क में ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को-टेररिज्म के आरोपों में ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अंतरिम में वेनेजुएला "चलाएगा" – तेल सुधारने के लिए।
वेनेजुएला में सड़कों पर कोई बड़ा विरोध नहीं। लोग अपने "चुने हुए" राष्ट्रपति के "अपहरण" पर चुप हैं। भारत में शायद ज्यादा शोर है।
अमेरिका डेमोक्रेसी बचाने नहीं गया – तेल का खेल है। लेकिन उन्हें पता था कि मादुरो का समर्थन कमजोर है।
वोट चोर सत्ता पर कब्जा कर सकता है, चुनाव का भ्रम दिखाकर वैधता दे सकता है। लेकिन सभी लोगों को हमेशा बेवकूफ नहीं बना सकता।
वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला निंदनीय है। लेकिन मादुरो से सहानुभूति की कोई जरूरत नहीं – वह वैध राष्ट्रपति नहीं, सिर्फ वोट चोर हैं।
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