अखंड भारत का नाटक और हिंदुत्व की असली चेहरा

जब हम उस पुराने कार्टून को देखते हैं जिसमें गांधी जी को रावण की तरह दिखाया गया है और “अखंड भारत” का बाण उन पर चलाया जा रहा है, तो सारी कहानी समझ आ जाती है।
1940 के दशक में विभाजन के समय ये लोग अखंड भारत नहीं चाहते थे। इनका डर हमेशा से यही रहा है कि भारत में मुसलमानों की आबादी ज्यादा ना हो जाए।
गांधी जी ने जो मुसलमान पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे, उन्हें भारत में रहने का अधिकार दिया। यही इन लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। आज भी ये लोग “अखंड भारत” का नाटक करते हैं। असलियत यह है कि अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को मिलाना पड़ा तो भारत में मुसलमानों की संख्या और बढ़ जाएगी — जो ये लोग कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इनका सपना “हिंदू राष्ट्र” का है, लेकिन उस राष्ट्र में समान नागरिक अधिकार, जाति प्रथा का खात्मा या सामाजिक न्याय नहीं है। इनका मकसद सदियों पुरानी वर्ण व्यवस्था को फिर से लागू करना है — जिसमें कुछ खास वर्णों का राज हो, बहुजन शोषित रहें।
महिलाओं को फिर से दबाकर रखना, लोकतंत्र ने उन्हें जो अधिकार दिए हैं उन्हें छीन लेना — यही इनकी असली मंशा है। इनके मुंह से कभी “रामराज्य” शब्द नहीं निकलता, जबकि रामराज्य तो गांधी जी की इच्छा थी — जिसमें अंतिम व्यक्ति का भी कल्याण हो।
आज का प्रदृश्य
आज के समय में आप देखेंगे तो सरकार के मंत्री हों या मुख्यमंत्री, मीडिया हो या सोशल मीडिया — रोजगार, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं करता। हिंदू-मुस्लिम के अलावा कोई चर्चा ही नहीं होती।
एक ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है कि मुगल राजाओं ने हम पर बहुत जुल्म किए, अब हमारी बारी है। जो घटनाएं मुसलमानों के साथ हो रही हैं, उन्हें देखकर एक खास वर्ग बहुत खुश होता है। और जो इसके खिलाफ हैं, वे चुप रहते हैं।
अकबर को महान क्यों कहते हैं, ये सब अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन उन्हें वो लोग पसंद ही नहीं जो समानता और भाईचारे की बात करें — चाहे वो हिंदू ही क्यों न हो,  जैसे गांधी जी।आज भी जो समानता और भाईचारे की बात कोई करता है तो इनको गालियां और धमकियां मिलती हैं।
इन्होंने लोगों का ब्रेनवॉश करके एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर दी है जिन्हें मुसलमान नाम ही पसंद नहीं। जबकि असल में ये लोग माला ही मुसलमान नाम की जपते हैं, उतना तो भगवान का नाम भी नहीं लेते।
ब्रह्मांड और ऊर्जा का नियम
एक प्रसिद्ध किताब है “द सीक्रेट”। उसमें Law of Attraction (आकर्षण का नियम) बताया गया है — कि आप जिस चीज का जितना ज्यादा नाम लेते हो, सोचते हो या चर्चा करते हो, चाहे वो प्यार से हो या नफरत से, ब्रह्मांड उसी ऊर्जा को आकर्षित करता है और उसी की तरफ खिंचता है।
यानी ये लोग जितना ज्यादा मुसलमानों का नाम नफरत के साथ ले रहे हैं, उतनी ही नकारात्मक ऊर्जा और विभाजन को खुद आमंत्रित कर रहे हैं।
इनकी विचारधारा नफरत और विभाजनकारी है। RSS को देख लीजिए — इसके प्रमुख पदों पर एक खास जाति (महाराष्ट्र ब्राह्मण) का वर्चस्व रहा है। कोई-कोई अलग दिखे तो वो भी बहुजन समाज से नहीं आता। इनके मुखौटे अलग-अलग हैं।
ये लोग खुलेआम नाथूराम गोडसे को पूजते हैं। गांधी जयंती पर गांधी जी की तस्वीर पर गोलियां चलाते हैं। गांधी जी का चरित्र हनन करने में ये कोई कसर नहीं छोड़ते।
लेकिन मजेदार बात यह है कि जब भारत का प्रधानमंत्री विदेश जाता है तो “गांधी जी के देश” से आया होने का फायदा उठाता है। विदेशी मेहमान आए तो गांधी जी के सामने झुकने का नाटक भी करना पड़ता है।
इतिहास गवाह है — नफरत की राजनीति का अंत हमेशा विनाशकारी होता है।
गांधी जी का संदेश
गांधी जी ने हमें सिखाया कि हिंदू-मुस्लिम एकता ही भारत की आत्मा है। उन्होंने रामराज्य की कल्पना की थी — न कि किसी जाति विशेष के राज की। उन्होंने हरिजनों के उद्धार के लिए, स्त्री शिक्षा के लिए और सच्चे अहिंसक समाज के लिए जीवन भर संघर्ष किया।
आज जरूरत है कि हम गांधी जी के उन सिद्धांतों को फिर से अपनाएं — सत्य, अहिंसा, समानता और भाईचारे के। नफरत और विभाजन की राजनीति को नकारें। एक समावेशी, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील भारत बनाएं, जहां हर धर्म, जाति और वर्ग का नागरिक बराबर का सम्मान पाए।
कितने मसीहा मर गए, अब भी इंतजार है
ज़हर पीकर भी ज़िन्दा हूँ, ये भी इंतजार है
सबके लिए एक है ये धरती, सबके लिए एक आकाश

जय हिंद। जय गांधी।

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