दादा नवाब कायम खां शहादत दिवस: सियासत की बिसात पर बंटती कौम या जागरूक युवाओं से बदलती जमीनी हकीकत?
कल पूरे राजस्थान में कौम के बानी (संस्थापक) और प्रथम पुरुष दादा नवाब कायम खां साहब का 607वां शहादत दिवस (यौम-ए-शहादत) मनाया गया। सोशल मीडिया फीड्स से लेकर सुबह के अखबारों तक, हर तरफ इस मौके पर हुए कार्यक्रमों की ही चर्चा रही। चूंकि यह शहादत का दिन था, इसलिए पूरे राज्य में किसी तरह के जश्न या दिखावे के बजाय पूर्वजों की याद में कुरानखानी, दुआ-ए-मगफिरत, रक्तदान और समाज सेवा के कार्यक्रम देखने को मिले।लेकिन जब फेसबुक, न्यूज पोर्टल्स और जमीनी हलचल को थोड़ा गहराई से टटोलते हैं, तो इस बार दो बिल्कुल अलग पहलू सामने आते हैं—एक तरफ राजनीति और नेतृत्व का बिखराव साफ नजर आ रहा था, तो दूसरी तरफ समाज के जागरूक युवाओं की वो नई सोच दिखी, जो कौम के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद जगाती है। 🏛️ शहादत के मंच पर राजनीति और दो धड़ों में बंटता समाज इस शहादत दिवस पर राजस्थान में दो ऐसे बड़े आयोजन हुए, जिन्होंने समाज के भीतर चल रही सियासी खींचतान को पूरी तरह से सतह पर ला दिया: जयपुर का 'कायम रत्न' कार्यक्रम (खानु खान जी का शक्ति-प्रदर्शन): जयपुर में खानु खान जी जिस मकसद और जितनी भीड़ की उम्मीद के स...